लोकाभिरामं रणरंगधीरं, राजीवनेत्रं रघुवंशनाथम्।
कारुण्यरूपं करुणाकरं तं, श्रीरामचन्द्रं शरणं प्रपद्ये॥
भव्य मंदिर निर्माण महायज्ञ में सहयोग देकर पुण्य कमाएँ। जय श्री राम!
लोकाभिरामं रणरंगधीरं, राजीवनेत्रं रघुवंशनाथम्।
कारुण्यरूपं करुणाकरं तं, श्रीरामचन्द्रं शरणं प्रपद्ये॥
|| श्री राम कृपा: धर्म, ज्ञान और सेवाभाव संकल्प के विस्तृत उद्देश्य ||
I. धार्मिक एवं आध्यात्मिक उत्थान (Religious & Spiritual Upliftment) –
• लोगों में आपसी सद्भावना, देश प्रेम की भावना व उनमें द्वेष भावना को समाप्त कर राष्ट्रीय एकता की भावना का विकास करना।
• मंदिर का संरक्षण एवं जीर्णोद्धार: श्री संकट हरण ज्ञान गुण सागर हनुमान मंदिर, त्रिपुरी धाम का प्राचीन गौरव बनाए रखते हुए, आवश्यक जीर्णोद्धार, पुनर्निर्माण और स्थायी रखरखाव सुनिश्चित करना।
• पूजा एवं नित्य सेवा: मंदिर में नित्य पूजा, आरती, भोग और धार्मिक अनुष्ठानों की उचित व्यवस्था करना तथा सभी धार्मिक कृत्यों को विधि-विधान से सम्पन्न कराना।
• मंदिर समिति के रख रखाव व उसकी विधिवत सेवा पूजा की व्यवस्था हेतु पुजारी नियुक्त करना जिससे लोगों में दया धर्म की भावना का विकास हो सके।
• धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन: हनुमान जयंती, रामनवमी, शिवरात्रि, भंडारा और अन्य महत्वपूर्ण पर्वों एवं उत्सवों का भव्य एवं सामूहिक आयोजन करना।
• संस्कृति का प्रचार: भारतीय सनातन संस्कृति, नैतिक मूल्यों और राष्ट्रीय भावना का प्रचार-प्रसार करना तथा समाज में धार्मिक समरसता स्थापित करना।
• तीर्थस्थल विकास: मंदिर को एक प्रमुख आध्यात्मिक एवं धार्मिक तीर्थस्थल के रूप में विकसित करना तथा भक्तों को आवश्यक सुविधाएँ प्रदान करना।
• साधकों हेतु सुविधा: आध्यात्मिक विकास हेतु साधकों, संत-महात्माओं और विद्वानों के लिए मंदिर परिसर में आवास एवं भोजन की उचित व्यवस्था करना।
• प्रकाश और ध्वनि: मंदिर परिसर को आकर्षक, भक्तिमय बनाने हेतु पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था और उच्च गुणवत्ता वाली ध्वनि (Sound System) एवं वाद्ययंत्रों की स्थायी व्यवस्था करना।
• संस्था की भूमि पर मंदिर समितियों की स्थापना करना व मंदिर की चल/अचल सम्पत्ति की देखभाल करना व उक्त सम्पत्ति से प्राप्त आय को मंदिर समिति के उद्देश्य पूर्ति में व्यय करना।
जय श्री राम
II. शैक्षिक, ज्ञान एवं कौशल विकास (Education, Knowledge & Skill Development) –
• निःशुल्क शिक्षा केंद्र: "ज्ञान गुण सागर" संकल्प के तहत, सभी आयु वर्ग के गरीब और वंचित बच्चों को निःशुल्क प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा प्रदान करने हेतु शिक्षण संस्थानों की स्थापना, संचालन एवं प्रबंधन करना।
• कौशल विकास केंद्र: युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने हेतु कंप्यूटर शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण (Vocational Training), और कौशल विकास (Skill Development) केंद्रों की स्थापना करना।
• पुस्तकालय और अध्ययन कक्ष: धर्म, इतिहास, विज्ञान और नैतिकता से संबंधित पुस्तकों से युक्त एक आधुनिक सार्वजनिक पुस्तकालय (Library) एवं अध्ययन कक्ष (Reading Room) की स्थापना करना।
• धार्मिक संस्कार शिक्षा: बच्चों और युवाओं में उच्च नैतिक मूल्यों और भारतीय संस्कारों के बीज बोने हेतु विशेष संस्कार कक्षाओं का संचालन करना।
• छात्रवृत्ति और सहायता: आर्थिक रूप से कमजोर, मेधावी छात्रों को शिक्षा जारी रखने में सहायता हेतु छात्रवृत्ति (Scholarship) एवं वित्तीय सहायता प्रदान करना।
• समाज हेतु ज्ञान: समाज के वृद्धजनों और युवाओं के लिए श्रीमद्भगवत गीता, रामायण जैसे धार्मिक ग्रंथों के अध्ययन हेतु विशेष कक्षाएँ आयोजित करना।
• शैक्षणिक भवन निर्माण: सोसायटी के उद्देश्यों की पूर्ति हेतु नियमानुसार विद्यालय भवन, कोचिंग संस्थान और छात्रावासों का निर्माण एवं प्रबंधन करना।
जय श्री राम
III. लोक कल्याण एवं सामाजिक सेवा (Public Welfare & Social Service) –
• भंडारा एवं अन्नदान: भूखों और निर्धनों के लिए नियमित और साप्ताहिक विशाल भंडारे, का आयोजन करना और अन्नदान को प्रोत्साहित करना।
• वस्त्र एवं आवश्यक सहायता: सर्दियों में गरीबों और बेघर लोगों को कम्बल, वस्त्र और अन्य आवश्यक सामग्री वितरित करना।
• स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सेवा: निःशुल्क चिकित्सा एवं स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन करना, और गंभीर रूप से बीमार ज़रूरतमंदों को दवाई और चिकित्सा सहायता प्रदान करना।
• संस्था द्वारा वृद्धाश्रम, अनाथाश्रम, मेला व बाजार तथा सामाजिक धार्मिक कार्यक्रमों का संचालन करना।
• पर्यावरण संरक्षण: मंदिर के आसपास और सार्वजनिक स्थलों पर वृक्षारोपण को बढ़ावा देना, वृक्षों को लगाना व वृक्षों की रक्षा के लिये प्रेरित करना तथा जल संरक्षण, स्वच्छता अभियान जैसे पर्यावरण सुरक्षा कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी करना।
• संस्था द्वारा भारत में विज्ञान, साहित्य, संगीत, नाट्य विद्या, ललित कलाओं के उत्थान, ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण तथा अनुसंधान हेतु तथा अन्य संस्थान, जो इसी तरह के उद्देश्यों के लिये कार्यरत हैं को प्रोत्साहन देने हेतु संस्थानों की स्थापना समर्थन, संचालन, अनुरक्षण तथा सहयोग प्रदान करना एवं उनको बढ़ावा देना।
• गौ-सेवा एवं गौशाला: गौ-सेवा और गौ-रक्षा को समर्पित कार्य करना, पशुओं और पक्षियों की सेवा तथा देखभाल हेतु पशु आश्रय व गौशालाओं का संचालन एवं संरक्षण तथा बीमार और असहाय गायों के लिए गौशालाओं का निर्माण करना।
• विपत्ति सहायता: बाढ़, सूखा, महामारी या प्राकृतिक आपदा के समय पीड़ितों और प्रभावित लोगों को तुरंत राहत सामग्री और आर्थिक सहायता प्रदान करना।
• धर्मार्थ विवाह: निर्धन एवं असहाय परिवारों की बेटियों के धर्मार्थ विवाह (Marriages) में सहयोग देना।
• इस संस्था के उद्देश्यों के अनुरूप कार्य करने वाली संस्थाओं को सहायता देना अथवा ऋण देना, उद्देश्य पूर्ति के लिये अन्य संस्थाओं से, वित्तीय संस्था अथवा व्यक्ति से ऋण लेना एवं दान लेना।
• उपरोक्त उद्देश्यों की पूर्ति हेतु आवश्यकता अनुसार संस्था के लिए चल अचल सम्पत्ति खरीदना, दान में लेना, किराये पर देना व लेना।
• दैवीय आपदाओं के समय पीड़ित जनता के मध्य राहत कार्य करना जैसे युद्ध, महामारी, दुर्घटना, बाढ़, सूखा आदि। इसके लिये पीड़ित जनता की सहायता विभिन्न प्रकार के रचनात्मक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन के द्वारा उन्हें मुफ्त भोजन, वस्त्र एवं दवा आदि की मदद पहुंचाने का कार्य करेगी।
जय श्री राम
IV. प्रशासनिक एवं कानूनी पारदर्शिता (Administrative & Legal Transparency) –
• पंजीकरण एवं विधिक अनुपालन: सोसायटी को फर्म्स सोसायटीज एवं चिट्स रजिस्ट्रार कार्यालय में विधिवत पंजीकृत कराना तथा सरकार और न्यायपालिका द्वारा जारी सभी नियमों और निर्देशों का अनुपालन करना।
• वित्तीय स्रोत एवं दान: सोसायटी के सभी उद्देश्यों की पूर्ति हेतु दान, चंदा, सहयोग और अनुदान प्राप्त करना तथा चल एवं अचल संपत्ति अर्जित करना।
• मंदिर की चल व अचल सम्पत्ति की रक्षा करना।
• लेखा-जोखा और ऑडिट: प्राप्त दान और किए गए व्यय का स्पष्ट, व्यवस्थित और कानूनी रूप से ऑडिट किया गया लेखा-जोखा (Account Records) रखना तथा इसे सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करना।
• संस्था के उद्देश्यों की पूर्ति हेतु स्थाई आर्थिक आय हेतु कार्य करना।
• विरोध/आपत्ति का निवारण: संस्था पर लगाए गए किसी भी विरोध या आपत्ति का कानूनी दायरे में रहकर, पारदर्शिता के साथ, और प्रशासनिक अधिकारियों के सहयोग से निवारण करना।
• सबका साथ राष्ट्र विकास की भावना के साथ सभी धर्म एवं सम्प्रदायों का सम्मान करते हुये समस्त उद्देश्यों का आवश्यकतानुसार निर्वहन किया जावेगा।
जय श्री राम